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बसंत पंचमी

[]◆बसंत पंचमी का महत्व◆[]

★विशेष रूप से सभी विद्यार्थयों को इस दिन माता सरस्वती जी की पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए, कल बसंत पंचमी के पूरे दिन आप अपने किसी भी नए कार्य का आरम्भ कर सकते हैं ये एक स्वयं सिद्ध और श्रेष्ठ मुहूर्त होता।

★मित्रो, बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में एक बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है, जिसमे हमारी परम्परा, भौगौलिक परिवर्तन, सामाजिककार्य तथा आध्यात्मिक पक्ष सभी का सम्मिश्रण है,

★भारतिय हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है।

★वास्तव में भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में पड़ने वाली छः ऋतुओं (बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में बसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है, और बसंत पंचमी के दिन को बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है, इसलिए बसंतपंचमी ऋतू परिवर्तन का दिन व मौसम का सिंधकाल भी है। ★इस दिन से प्राकृतिक का सौन्दर्य निखारना शुरू हो जाता है पेड़ों पर पुरानी जाकर, नयी पत्तिया कोपले और कालिया खिलना शुरू हो जाती हैं पूरी प्रकृति व सजीव प्राणी एक नवीन उत्साह व ऊर्जा से भर उठती है।

★इसके अलावा बसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है, यह माता सरस्वती का प्राकट्योत्सव भी है, इस लिए इस दिन विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा उपासना कर उनसे विद्या बुद्धि प्राप्ति की कामना की जाती है।

इसी लिए विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत विशेष होता है,.बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत ऊर्जामय ढंग से और विभिन्न प्रकार से पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है इस दिन पीले वस्त्र पहनने और खिचड़ी बनाने और बाटने की प्रथा भी प्रचलित है।

इस दिन बसंत ऋतु के आगमन होने से आकाश में हजारो रंगीन पतंगे उड़ने की परम्परा भी बहुत दीर्घकाल से प्रचलन में है। माता सरस्वती जी रथयात्रा भी सुरजकुंड मंदिर से निकाली जाती है।

★इसके अलावा बसंत पंचमी के दिन का एक और विशेष महत्व भी है बसंत पंचमी को मुहूर्तशास्त्र के अनुसार एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त और अनसूझ साया भी माना गया है, इस दिन कोई भी शुभ मंगल कार्य करने के लिए पंचांग शुद्धि की आवश्यकता नहीं होती, बस राहू काल में शुभ कार्य न करें, इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, व्यापार आरम्भ करना, सगाई और विवाह आदि मंगल कार्य किये जा सकते हैं।

■आप मिठ्ठे पीले चावल व पुलाव खाये खिलाये, भगवान का भोग भी जरूर लगाये, भाव में ही ईश्वर बसते है, सभी को डॉ दिपक सिंह की तरफ से माता सरस्वती उत्पन्न दिवस और बसंतपंचमी की शुभ व मंगलमय कामनाये ।

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